英文字典中文字典


英文字典中文字典51ZiDian.com



中文字典辞典   英文字典 a   b   c   d   e   f   g   h   i   j   k   l   m   n   o   p   q   r   s   t   u   v   w   x   y   z       







请输入英文单字,中文词皆可:


请选择你想看的字典辞典:
单词字典翻译
galit查看 galit 在百度字典中的解释百度英翻中〔查看〕
galit查看 galit 在Google字典中的解释Google英翻中〔查看〕
galit查看 galit 在Yahoo字典中的解释Yahoo英翻中〔查看〕





安装中文字典英文字典查询工具!


中文字典英文字典工具:
选择颜色:
输入中英文单字

































































英文字典中文字典相关资料:


  • वर्तमान समय में मानव मूल्य की प्रासंगिकता मानव मूल्य आज के समय. . . | Filo
    इस प्रकार, मानव मूल्य न केवल व्यक्तिगत जीवन को समृद्ध करते हैं बल्कि समाज को भी एक बेहतर और न्यायसंगत स्थान बनाते हैं।
  • वर्तमान समय में मानव मूल्य की प्रासंगिकता वर्तमान समय में मानव मूल्यों क. .
    निष्कर्ष: वर्तमान समय में तकनीकी और सामाजिक बदलावों के बीच मानव मूल्यों का पालन समाज को स्थिर, समृद्ध और नैतिक रूप से मजबूत बनाता है
  • आधुनिक समाज में मानव-मूल्यों की प्रासंगिकता
    मनुष्य एक सामाजिक प्राणी है। वह बुद्धिजीवी है, उसमें अच्छे-बुरे को समझने- करने की शक्ति होती है और इसी कारण वह नैतिक कहलाता है। समाज व्यक्तियों का ऐसा समूह है, जहाँ मेलजोल और अच्छा आचरण आवश्यक होता है। इस गुण के आधार पर मनुष्य के लिए अपनी सभी परिस्थितियों के साथ साहचर्य एवं समायोजन करना सम्भव होता है। ऐसे आचरण के कारण ही मनुष्य को सामाजिक मान्यता एवं पद मिलते है। समाज ही उसे जन्म देता है और विकसित करता है समाज में रहकर ही मनुष्य मनुष्यत्व का गौरव तथा व्यक्तित्व की विशिष्टता प्राप्त करता है। व्यक्ति समाज की व्यवस्था के वृत में रहकर ही अपनी जीवन यात्रा प्रारंभ करता है तथा अपने आत्म-विस्तार, आत्मा-संरक्षा और आत्मोपलब्धि के लिए प्रयासरत रहता है। मानव समाज को अपने जीवन काल में सफलता हेतु एक लक्ष्य निर्धारित करना होता है जो लक्ष्य कुछ नियमों, संयम, दया, करुणा आदि नैतिक मूल्यों को पालन करने से ही प्राप्त होते हैं। अरस्तू ने मानव को सामाजिक प्राणी मानते हुए कहा है कि "जो मनुष्य समाज में नहीं रहता वह वास्तव में मनुष्य न होकर या तो पशु है या देवता।" (1) मूल्यों के इसी सामाजिक महत्व को अज्ञेय जी ने इन शब्दों में व्यक्त किया है - "जिस समाज में कोई ऐसे मूल्य नहीं हैं जिनके लिए जिया जाता है और जिनके लिए मरा भी जा सकता है, वह समाज अपने मन के साथ बलात्कार की स्थिति स्वीकार कर चुका है, अपना मन ही बलात्कारी को सौंप चुका है। समाज को पुलिस या सरकार या संसद नहीं बचाती, समाज को अपनी शक्ति बचाती है जो उन मूल्यों से मिलती है जिनके लिए वह जीता है।" (2)
  • आज के दौर में मानवता की प्रासंगिकता
    आज के दौर में मानवता केवल एक आदर्श नहीं, बल्कि जीवन की अनिवार्यता है। यही वह मूल्य है जो समाज को जोड़ता है, इंसान को इंसान बनाता है और
  • मानव मूल्य और साहित्य (Human Values and Literature)
    आज जब समाज भौतिकता और स्वार्थ की ओर झुक रहा है, तब साहित्य की भूमिका और भी महत्वपूर्ण हो गई है। युवा पीढ़ी को साहित्य के माध्यम से
  • मूल्यों को विकसित करने में परिवार, समाज और शैक्षिक संस्थानों की भूमिका
    मूल मूल्यों और सामाजिक मानदंडों को विकसित करने में परिवार, समाज और शैक्षणिक संस्थानों द्वारा निभाई जाने वाली भूमिकाएँ।
  • मानवीय मूल्य: परिभाषा, प्रकार और उदाहरण
    मानवीय मूल्यों को स्पष्ट परिभाषाओं, प्रकारों, वास्तविक जीवन के उदाहरणों और नैतिकता व लोक प्रशासन में उनकी भूमिका के साथ समझें—UPSC
  • Human society | traditional values | modern ideology | importance of . . .
    परंपरा हमेशा से हमारे जीवन का आधार रही हैं। ये सिर्फ रीतिरिवाज नहीं बल्कि हमारे जीवन मूल्यों, संस्कारों और व्यवहारों का संग्रह
  • नीतिशास्त्र एवं मानवीय मूल्य - Connect Civils
    नीतिशास्त्र एक मानक विज्ञान और दर्शन शास्त्र की एक शाखा है, जो यह निर्धारित करती है कि एक संवेदनशील प्राणी को किस प्रकार के कर्म करने चाहिए, ताकि वह कर्म नैतिक रूप से अच्छे या बुरे, सही या गलत, और उपयुक्त या अनुपयुक्त के रूप में चिन्हित किए जा सके
  • वैदिक षिक्षा से आधुनिक षिक्षा तक: नैतिक मूल्यों की यात्रा और आज की . . .
    प्राचीन भारत की वैदिक शिक्षा पद्धति केवल ज्ञान अर्जन का माध्यम नहीं थी, बल्कि यह जीवन के सर्वांगीण विकास का साधन थी, जिसमें नैतिक और चारित्रिक मूल्य सर्वाेपरि स्थान रखते थे। ऋषि-मुनियों द्वारा संचालित गुरुकुल व्यवस्था में सत्य, अहिंसा, ब्रह्मचर्य, संयम, कर्तव्यनिष्ठा और समाज सेवा जैसे नैतिक आदर्शों को विद्यार्थियों के जीवन में व्यावहारिक रूप से स्थापित किया जाता था। कालक्रम में भारत की शिक्षा पद्धति ने अनेक बदलाव देखे। मध्यकाल में जहाँ शिक्षा धार्मिक और शास्त्रीय अध्ययन तक सीमित हो गई, वहीं औपनिवेशिक काल में पश्चिमी शिक्षा के प्रभाव के कारण नैतिक शिक्षा का मूल स्वरूप कमजोर होता चला गया। स्वतंत्रता के पश्चात भारत में आधुनिक शिक्षा प्रणाली का विकास हुआ, जिसने विज्ञान और तकनीकी प्रगति को बढ़ावा दिया, परंतु नैतिक मूल्यों के क्षरण की चुनौती भी प्रस्तुत की। आज के सामाजिक परिप्रेक्ष्य में जब नैतिक पतन, भौतिकतावाद और व्यक्तिगत स्वार्थ की प्रवृत्तियाँ बढ़ रही हैं, वैदिक शिक्षा से प्राप्त नैतिक शिक्षाएँ अत्यंत प्रासंगिक हो जाती हैं। यह शोध पत्र वैदिक शिक्षा से आधुनिक शिक्षा तक नैतिक मूल्यों के विकास और परिवर्तन की यात्रा का विश्लेषण करेगा और यह भी स्पष्ट करेगा कि वर्तमान समय में उन प्राचीन मूल्यों की पुनस्र्थापना क्यों आवश्यक है। इस अध्ययन के माध्यम से यह संदेश दिया जाएगा कि नैतिकता के बिना शिक्षा अधूरी है और वर्तमान समय में शिक्षा प्रणाली में नैतिक मूल्यों के पुनः समावेश से ही एक संतुलित और जिम्मेदार समाज की स्थापना संभव है।





中文字典-英文字典  2005-2009